फेल होना एक कला है, फेल होना कोई आसान काम थोडे ही है, फेल होने के
लिए अपने मन को मनाना पड़ता है हम रोजाना किताबों के दर्शन करें और मन के
बार-बार ‘‘पढ़ले-पढ़ले” कहने पर भी न पढें किताबों को छुऐं भी नहीं, यह
बड़ा मुश्किल काम है। अब तक जो लोग फेल होने के फायदे नहीं नहीं जानते थे
वे लोग भी क्या जाने कि फेल होने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़ते है․․․․
फेल होने के लिए उत्तरपुस्तिका को खाली छोड़ना पड़ता है․․․․ किताबों को
पेटी में ताला लगाकर चाबी बाहर कहीं नदी-नाले में फेंकनी पड़ती हैं तब जाकर
कहीं फेल होने का महा अभियान शुरू होता हैं। फेल होने में जोखिम भी है यदि
किसी घर-परिवार के व्यक्ति को हमारे प्लान का पता लग गया तो गई भैंस
पानी में․․․ फिर तो डर के मारे पढ़ना पढे़ और पास होना पड़े। स्कूल के
बहाने बनाकर अनुपस्थित रहने की योजना पर पानी न फिर जाए इसकी भी सावधानी
रखनी पड़ती है यानि कि हर तरफ से खतरा ही खतरा․․․․। फिर भी धन्य हैं वे
लोग जो इतने खतरे उठाने के बाद फेल हो जाते हैं।
दरअसल ऐसे लोग जो फेल होते हैं ऐसे बंदों को भगवान सोच-समझकर बडे ही आलस
से बनाता है। इसका कारण है कि जो फेल होता है वो भगवान को ज्यादा याद
करता है। अतः भगवान ने परेशान होकर ऐसे बंदे बनाना छोड़ दिया रही सही कसर
सरकार ने पूरी कर दी कि आठवीं तक कोई फेल न हो। इसके बाद भी यदि कोई
विद्यार्थी कक्षा आठ में खाली कॉपी देकर फेल करने के लिए परीक्षक को चैलेंज
देता है तो ऐसे महापुरूष को तो मैं कोटि-कोटि प्रणाम करता हूँ क्योंकि
वही एक ऐसा विद्यार्थी था जिसने फैलियर वर्ग की नाक कटने से बचा ली, आखिर
ऐसे लोग कम ही होते हैं जो दूसरों की शान बचाने के लिए अपने एक साल का
बलिदान कर देते हैं ये तो लोगों की ही नासमझी है कि ऐसे विद्यार्थी को वे
गाली या भला बुरा कहते हैं उसकी बलिदान की पीछे की भावना को नहीं समझते है।
दरअसल फेल होने के अनेक फायदे है, फेल होने वाला विद्यार्थी अपने जूनियर
से कम्पीटीशन में आगे रहता है क्योंकि जूनियर तो पहली बार ही नया कोर्स
पढ़ रहा है लेकिन फैलियर का रिवीजन हो जाता है वह क्लास में सबसे होशियार
और अच्छे अंकों से पास होता हैं इसलिए एक ही क्लास में जितनी बार फेल हों
उतना ही अच्छा है एक दिन ऐसा आयेगा कि आप बार-बार उसी सिलेबस को
पढ़-पढ़कर मैरिट में आऐंगे, वो कहावत तो सुनी होगी करत-करत अभ्यास के․․․․
दूसरा फायदा ये है कि यदि आप सह शिक्षा वाले संस्थान (लडके-लडकियों की
एक साथ शिक्षा) में पढ़ रहे हैं तो फिर तो आपको आपकी जूनियर गर्लफ्रेंड के
साथ एक ही क्लास में देर तक बैठने का मोैका मिलता है आप उसे ये भी कह सकते
हैं कि आप केवल उसी के लिए फेल हुए हैं․․․․ इम्प्रेशन अच्छा जमेगा। यदि
आप किसी बोर्ड कक्षा में फेल हो जाते हैं तो इसके तो विशेष फायदे है या तो
घरवाले आपकी पढ़ाई छुड़ा देंगे आपकी पढ़ाई की तकलीफ खत्म हो जाएगी अन्यथा
यदि दोबारा पढ़ने को कहेंगे तो उन्हें आपसे अच्छे अंक लाने की उम्मीद
खत्म हो जाएगी फिर आप कम पढाई करके पास हो सकते है।
मैं तो कहता हूँ कि हर क्लास में फेल होते रहिए ताकि प्रिंसिपल भी आपकी
इस कला की दाद देने लगे आखिर ये कला हर किसी में थोडे ही हाती हैं। यदि अब
भी किसी को फेल होने की तरकीब नहीं सूझ रही हो तो मुझसे फेल होने की
कोचिंग ले सकते हैं। फीस भी बहुत कम है जल्दी पधारकर अपना स्थान रिजर्व
करें क्यूंकि लेख लिखने से पहले ही पचास-साठ हजार सीटें बुक हो चुकी हैं
स्थान कम ही बचे हैं एक बार फेल होकर तो देखिए․․․․ अच्छा लगता है।
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