आज तुमने दिल तोड़ने की बात
क्यों कर दी
मैं तो आज दिल तुम्हे ही देने बाला था
कहाँ गयी हो छोड़कर मुझे
अय हंसी
मैं तो अभी खुद ही तेज
रोने बाला था
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वो बारिश को अपना दुश्मन मान बैठे भारत
कम्बख्त हम थे
की
छतरी खोले
उनका इंतज़ार करते रहे
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जो तेरी एक झलक देखी
तो मन खुशियों से झूम गया
मनो कोई डूबते प्राणी को
सागर में कोई सहारा हो
तेरी यादों में रो रोकर
जो पन्ने हमने लिख डाले
मेरे जीवन की ये यादें
जो तू पढ़ती तो तू रोती
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ज़माने ने हमे अब तक दिया ही क्या है
भारत
ये तो हम हैं
की
ज़माने से अब तक
दिल लगाये बैठे हैं
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बिस्तर पर न नींद यहाँ
चेहरे पे उदासी छायी हैं
क्या नाम रखूं इस प्यार का
बस
लिखने की कलम उठाई हैं
ए खुद तू ही बता
ये प्यार हैं या है पागलपन
क्या नाम दूँ
इस प्यार को
जिसने
आँखे मेरी रुलायी हैं
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आज तुमने दिल तोड़ने की बात
क्यों कर दी
मैं तो आज दिल तुम्हे ही देने बाला था
कहाँ गयी हो छोड़कर मुझे
अय हंसी
मैं तो अभी खुद ही तेज
रोने बाला था
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तुझे छूकर हवा मेरे पास आई
लगा जैसे तुम ही
यूँ
छूकर गए मुझे …
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2.
तुझे मानना तो आता हैं
मेरे दोस्त मुझे
पर
सोचता हूँ
तुझे नाराज़ क्यूँ करें
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3.
तुझे कुछ इस कदर
चाहते हैं अय दिल
चाहकर भी तुझे यूँ कभी हम
छोड़ नही सकते
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4.
तुझसे प्यार इतना हुआ हैं अय परी
कि
देखे बिना अब तुझे दिल
मेरा नही लगता
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6.
तुझसे करते भी हैं
तुझपे मरते भी हैं
तुझे पता नही अय दोस्त
हम
तेरे भाई से डरते भी हैं
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कवि विनय भारत