Monday, 24 August 2015

कुछ हास्य कविताएं -भाग - 1- विनय भारत

शोपिंग


एक शोपिंग माल में हमें प्यार हो गया
यूँ हीं आते जाते इकरारहो गया
शोपिंग की लत इतनी थी उन्हे क्या बताऊँ यार
शोपिंग कराके प्यार में
कंगाल हो गया

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बूढ़े का वेलेंटाइन 


एक बूढ़ा देख एक हसीना को बोला यूँ
नीली आँखों वाली कभी इश्क तो लडाइये
तुम्हारी अदाओं का मैं दीवाना सा बन गया हूँ
आकर के कभी हमसे नैन तो मिलाइये

बोली हसीना देख हड्डियों के ढांचे को
नसों में गुल्कोज की बोतल चढवाइये
और

फोड़ नहीं सकते जो चना कभी दाँतों से
फिर

अखरोट फोडने की बात ना चलाइये
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 एक रेल में 

रेल में वे बोले
स्फूर्ति और रफ्तार शरीर में जगाइये
हमारी वस्तु लीजिए और थकान मिटाइये
भरी भीड़ में अलग चमकेंगे आप
ऐसा जोश पाइये
मैंने कहा –
नहीं मिला परिणाम तो क्या पैसे लौटाइये ?
वे बोले-
जरूर मिलेगा
पहले ये जमालघोटा की
गोलियाँ तो खाइये!

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 लडकियों की” हैलो- हाय” 

एक को लाइन मारे
दूजे को सताय
तीजे को तडफाय
चौंथे को फसाय
पांचवे के साथ मंदिर जाके
छठे के साथ फेरे ले जाए

ऐसी ही होती है लडकियों की
है लो – हाय
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  टाई 
एक पार्टी में मेरा मित्र मुझसे बोला यूं
कवि जी बताइये आप टाई क्यूँ पहनते
मैंने कहा टाई पहनता हूँ इसलिये सुन
क्यूंकि गले में जूते फिट नहीं टँगते
बोला वो कवि जी बहुत खूब बोलते हैं
आपको हमेशा मजाक का ही काम हैं

मैंने कहा टाई पहनता हूँ इसलिए सुन
रुमाल घर रह गया और मुझको जुकाम हैं।


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बदमाश लौंडे 
 
उसको देखा तो लगा मानो मंजिल है यही
उसकी सहेली को देखा तो लगा मानो मंजिल है वही
तीसरी को देख प्यार हो जाता है
चौंथी का घर हमें अपना ससुराल नजर आता है
पाँचवी की माँ हमें अपनी सास नजर आती है
हर मोड़ पर लडकों की मुमताज़ बदल जाती हैं!

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हँसी और जिंदगी
 
एक प्यार तराना लिखता हूँ
जीने का फसाना लिखता हूँ
मैं रोते – रोते भी यारों
हँसने का बहाना लिखता हूँ 
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पत्नी पर बातचीत
 एक राह में चलते चलते
एक मीत मिला
मैंने कहा वर्खुद्दार
कहा जा रहे हो दौडे दौड़े

वो बोल्या
गुरूजी

भैंस खो गयी है म्हारी
मैंने कहा भाई
हमारी
तो घर पे
रोटी बना रही है 

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हसीना की हँसी
 तेरी हंसी ने हसीना सुन
ऐसा खेल कर दिया
हमे उसी क्लास में
फिर से फेल कर दिया
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डेंजर जीव
लोग अपने बच्चों का नाम रखते हैं
आशू
याशु
वा
सू

तासू
और
महिलाओं में सबसे डेंजर जीव होती है
सासू 
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कवि विनय भारत

 

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