Saturday, 22 August 2015

फ़ेसबुकिया बाबू की कुछ पंक्तियां.......... कवि विनय भारत

काव्य - 1

''फेसबुक''
लडकी लडकी सब कहे
दीदी कहे ना कोय
जो लडकी सू दीदी कहे
वही ब्लैक लिस्ट होय
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काव्य - 2

''मत''

जब वो माँगने आये वोट
देके हाथ में बोले नोट
” मत” देना हमको ही
वरना दे देंगे कोई चोट 
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 काव्य -3
  “कैरेक्टर ढीला है”
भैंसे के साथ नेताजी की भैंस भागी
इसमें कौन बडी लीला है
नेताजी करें तो प्यार भैंस करे तो उसका
“कैरेक्टर ढीला है”
   
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 काव्य -4
राज़..
हम उनके इशारों पर जोकर बन चुके ‘भारत’
और वो हैं कि
राज पे राज छुपाते चले गए
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काव्य - 5

उहापोह..

जिंदगी ने ऐसे मोड पर लाकर खडा कर दिया” भारत”
दूर तक रेगिस्तान था और वापस मुड नहीं सके
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 काव्य - 6 
जाग्रति फैलायेंगे
चल पडी आँधी यहाँ
अब कोई रोक ना पायेगा
जला चुका हूँ मैं दीपक
वो रोशनी कर जाएगा
बुझने ना देगा जो प्रकाश
कोई ऐसा वीर आयेगा
मेरे दीपक की इस लौ से
कोई दीप से दीप जलायेगा!
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काव्य -7
 बीमारी..
जब से देखा है उसके प्रभाव को
दिन रात आहें भरता हूँ
इसका क्या है इलाज
दिन रात करवटें बदलता हूँ
कैसी है वो दिलजली
जिसके कारण मची है
दिल में खलबली
बच के रहना इससे यारों
ये है करारी जान बडी
ले लेगी जान अपने प्यार में
बडी बुरी ये करमजली
क्यूँकि
चली चली फिर चली चली
चली स्वाइन फ्लू की हवा चली
चक्कर में पड मरीज इसके
ढूँढे डाक्टर गली गली
चली चली फिर.....
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काव्य -8
प्यार के कुछ पल अहसास के”
दिल ने याद किया है तुझे
सोंचता हूँ
तुझे हिचकी
आई तो होगी
रातें काली गुजर गई
मेरी यहाँ
सोंचता हूँ
तुझे भी क्या नींद
आयी ही होगी
सपने में देखी थी
तेरीबैचेन सी झलक
सोंचता हूँ
तू भी मिलने
आयी तो होगी


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काव्य -9
 वाह! रे आदमी
वाह रे वाह आदमी
तेरा खेल निराला है
आदमी से तुझे प्यार नहीं
और तूने कुत्ता पाला है


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काव्य -10
” लड़की चालीसा”
वाह री लडकी !
तू भी क्या बला है
पहले प्यार करती बाद में
खोखला हैतूने जाने अब तक
कितनों को फँसाया
जिसने तुझको चाहा
तूने उसी को रूलाया
तेरा ये प्यार कैसा
जो चाहे हरदम पैसा
तू उसे नहीं देखे
हो कोइ ऐसा- वैसा
तेरी नजर का जादू
कर देता है बेकाबूतेरी
है ऐसी माया
कोइ समझ ही ना पाया
हे लडकी कृपा कर दो
अब हमको धोखा मत दो
मत आओ जिंदगी में
ना जीवन खराब कर दोमैं
मस्ती में हूँ डूबा
मुझे मस्ती में रहने दो
बस इतनी कृपा कर दो

बस इतनी कृपा कर दो
श्लोक -लडकों के कल्याण हित ,
लिया गर्लफ्रेंड अवतार!

जिस पर कृपा है तेरी ,
वो लव सागर पार!!१!!

नाम रूप अनेक हैं ,
अनेक भक्त हैं साथ !

तेरे प्रेम जलधि में सुन
जो डूबा सो पार!!२!!
देवी वर एक दीजिये
पूर्ण होवेंसब काम!
कुँवारे कभी ना मरें
जो जपें तिहारो नाम!!३!!

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 काव्य -11
 व्यंग्य
हेभारत मीडिया
तू ये क्या गजब ढा रहा है
टी आर पी बढती जा रही हैऔर
संस्कार मिटाता जा रहा है! 

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 काव्य -12
ऐ जिंदगी
जिंदगी कुछ ऐसा कर
जिंदगी कुछ वैसा कर
कुछ ऐसा कर
कुछ वैसा कर
कुछ कर के कर
कुछ कर ना कर
पर
करके फिर कुछ ऐसा कर
कि
पता चले कि

ये तूने क्या किया


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 काव्य -13
माय स्वीटू
 
तू है माय स्वीटू
मेरी न्यारी स्वीटू
जान तू मेरी
चाह तू मेरी
लव तुझसे करता
तुझपे मैं मरता
तू जो ना मिलती
औरमै तडपता
तू ही फरारी
सबसे है प्यारी
आई लव स्वीटू
यूटू सिर्फ मीटू
तू है तो मैं हूँ
तेरा सिर्फ मैं हूँ
मैं हूँ तेरा तोता
तू है मेरी मैना
मैं हूँ तेरा ईश्वर
तू है मेरी आरती
मैं हूँ तेरा विविध
तू है मेरी भारती
तू मेरी है जननत
ओ माय स्वीटू

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 काव्य -14
उफ!
मैने उससे कहा
प्यार करता हूँ
तेरी सादगी से
तेरी मासूमियत से
औरतुझसे
वो बोलीप्यार तो
मुझेभीतुझसेपर
डरतीहूँ
यदिपता चला
मेरे घरवालों को
पिता को
भाई को
तोतुझे
यूँरोता देख
कभी खुश नारह पाउँगी
ना सुख से कभी जी पाउँगी
ना तेरे बिन मर पाउँगी
माफ करना
ए मेरेदिल
तुझसे रिश्ता ना रख पाउँगी
उफ!

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 काव्य -15
 “सिर्फ तू”
तेरी यादें हैं
तेरी बातें हैं
पर
तू नहीं
तो लगता है
सब कुछ हो कर भी कुछ नही
दिल से…
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“वो”
उसको देखा है
खुले आसमाँ में
सर्द सी हवाओं में
वो दूर है लेकिन
महसूसकर रहा हूँ
इस चाँदनी
रात में
वो है तो लगता हैं
कि दुनिया हैं
वरना
रखा ही क्या हैं
इस बेदर्द जमाने में
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 मेरा प्यार”
 प्यार है वो
पूजा है वो
मान है वो
मेरी
जान है वो
रेगिस्तान में
अमृत पान है वो
वो दुख में
जीवन धारा है
सुख में
प्रेम का प्याला है
है वो
घर
जो हर मौसम के
अनुकूल होता है
वही तो
मेरा यार है
जो दुख में
मेरे साथ रोता है
है वो साथी
जो मुझे
हँसाता है
वही तो है
जो
मेरी कविताओं
को गाता है
वो है तो मैं
हूँ
हाँ
वही
तो
है
सिर्फ
मेरा और सिर्फ मेरा

सच्चा प्यार

कवि~ विनय भारत
 
 

 

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