Thursday, 27 August 2015

कुछ व्यंग्य कविताएं -भाग -1 - विनय भारत

बी एड वर्क 


मैंने अपने मित्र से कहा
एक मन कहता हैं
कहानी लिख

एक मन कहता हैं नाटक लिख
एक
कहता हैं लघुकथा लिख

कभी कहता है
लिख डाल
कविता

समझ नहीं आता
लिखूँ
तो क्या लिखूँ

तभी तपाक से मेरा मित्र बोला
ना हिंदी लिख ना बिंदी लिख

अबे
साहित्य छोड

पहले सैशनल लिख


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प्याज पर बबाल 

मेरे मित्र के घर इन्कम टैक्स
का छापा पड गया
मैंने मित्र से पूँछा
यार
तू कंगाल गरीब आदमी

तेरे यहाँ छापा क्यूँ पड़ा
तेरे पास काहे की सम्पत्ति थी
वो बोल संपत्ति कहे की यार
बस पांच किलो प्याज थे

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 वाह री दोस्ती
वे बोले –
आप बहुत कम – कम बोलते हो
हमने कहा –
बोलती बंद हो गयी हमारी
जबसे आप दोस्त हुए
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मेरे उपनामकरण पर कविता




मेरे दोस्तों ने मुझसे पूंछा कि
आप भारत क्यूँ लगाते हैं
मैंने कहा –
भारत में रहते हैं भारत की खाते हैं
भारत लगाने में हमारा क्या जाता है
भारत में जन्म लिया भारत में शिक्षा ली है
भारतीय बच्चों को भारत में पढ़ाते है
भारत ही राष्ट्र मेरा भारत ने सब दिया है
भारत की माटी को हम शीश
झुकाते हैं

इसीलिए विनय शर्मा भारत लिखा करते हैं
भारत में रहके विनय भारत लगाते है 

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 मेरे देश की अशिक्षा 

मुझे मेरे देश की
अनपढ़ता का
पता
तब चला

जब एक
रेलवे स्टेशन पर

विक्रेता से
ग्राहक द्वारा
बीडी का बंडल
माँगा गया
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मेरे देश की दुर्दशा 
मुझे मेरे
देश की दुर्दशा
का पता
तब चला
जब एक नोनवेज होटल के बाहर लिखा था

यहाँ बकरे का
“शुद्ध” मीट मिलता हैं
हाय देश की
दुर्दशा
यहाँ भी मिलावट ! 
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मंच सञ्चालन पर तालियों के लिए
दुःख सुख जिसके कभी साथ नहीं
उस जीवन में कुछ खास नही
वो महफिल भी क्या महफ़िल हैं
जिसमे खुलते कभी हाथ नहीं 
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श्री गणेशाय नमः 

 करूँ प्रणाम मैं रणत भँवर को
सुनते हैं जो सबकी पुकार
एकदंत मोदक प्रिय मूषक वाहन
करें कल्याण
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 रिश्ता- ए -दोस्ती
ये दोस्ती नही आसां
बस इतना समझ लीजिये
एक
प्यारका रिश्ता हैं
और निभाते जाना हैं

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जल्दबाज लोग 
मुझे मेरे देश की जल्दबाजी
का पता तब चला
जब रेल के पायदान
पर
नीचे तक लटकते

लोगों में से
एक फिसल
कर गिर गया

उफ़! 
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प्रयासरत – विविधा 2013 की सम्पादकीय पंक्तियाँ
तुम संघर्ष करो भारत
युग में परिवर्तन आएगा
संकट चाहे कितने आयें
जो होगा देखा जायेगा 
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  अतिथि स्वागत-1
स्वागत में आपके हम मार्ग सजाने आए
हाथों में हम हमारे फूलों की माला लाये
विशिष्ट हो हमारे सम्माननीय तुम हो
तुम्हारे स्वागतम में पलकें विछा के आए 
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  अतिथि स्वागत-2

फूलों से कर रहे हैं स्वागत हम तुम्हारा
हमारे यहाँ पधारे अहसान है तुम्हारा
आप यहाँ पधारे महकी हमारी बगिया
आशीष से तुम्हारे कार्यक्रम सफल हमारा 

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विनय भारत
 

 


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